घर-घर सजी रंगोली, मार्गों पर हुई आरती से स्वागत; नगर भ्रमण में उमड़े श्रद्धालु, विधि-विधान से संपन्न हुई प्रतिमा स्थापना
तेजाराम साहू खातेगांव। धर्मनगरी खातेगांव में दिगंबर जैन समाज ने रविवार को एक ऐतिहासिक धार्मिक अवसर का साक्षी बनकर भक्ति और श्रद्धा का अनूठा संगम देखा। करीब 203 वर्षों बाद मूलनायक श्री 1008 मुनिसुव्रतनाथ भगवान का गगन विहार एवं नगर भ्रमण निकाला गया। इस दौरान श्रद्धालुओं ने जगह-जगह आरती उतारकर स्वागत किया, वहीं जैन परिवारों ने घरों के बाहर रंगोली सजाकर अपनी आस्था प्रकट की।
आचार्य गुरुवर श्री 108 विद्यासागर महाराज एवं आचार्य श्री 108 समयसागर महाराज के परम आशीर्वाद तथा निर्यापक श्रमण मुनि श्री 108 संभवसागर महाराज के ससंघ सानिध्य में आयोजित महोत्सव की शुरुआत सुबह अभिषेक, शांतिधारा, नित्य पूजन और विशेष धार्मिक अनुष्ठानों से हुई। आचार्यश्री की पूजन, मुनिश्री के मंगल प्रवचन तथा विश्वशांति महायज्ञ एवं हवन की पूर्णाहुति के बाद शोभायात्रा का शुभारंभ हुआ।
भक्ति के रंग में रंगा नगर, जगह-जगह हुआ स्वागत
प्राचीन बड़े जैन मंदिर से निकली शोभायात्रा में श्रीजी को रथ पर विराजमान कर नगर के विभिन्न मार्गों से ले जाया गया। मुनिसंघ की उपस्थिति में निकले इस धार्मिक जुलूस में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। यात्रा मार्ग पर जैन समाज के परिवारों के साथ अन्य धर्मों के लोगों ने भी आरती उतारकर स्वागत किया। घरों के बाहर सजी रंगोलियां और श्रद्धालुओं की सहभागिता ने पूरे नगर को भक्तिमय बना दिया।
नवीन अस्थायी जिनालय में हुई प्रतिमा स्थापना
नगर भ्रमण के बाद शोभायात्रा बुराड़ा वाले सेठी परिवार की ओर से प्रदत्त भूमि पर निर्मित नवीन अस्थायी जिनालय पहुंची। यहां श्रीजी का मंगल प्रवेश कराया गया। इसके बाद नवीन वेदी का संस्कार एवं शुद्धिकरण कर विधि-विधान के साथ मूलनायक भगवान की प्रतिमा को वेदी पर विराजमान किया गया। प्रतिमा स्थापना के पश्चात अभिषेक, शांतिधारा और पूजन संपन्न हुए। मुनि श्री संभवसागर महाराज ने मंगल प्रवचन के माध्यम से श्रद्धालुओं को धर्म और आध्यात्मिक जीवन का संदेश दिया।
विभिन्न धार्मिक क्रियाओं का परिवारों को मिला सौभाग्य
जैन समाज के अध्यक्ष निखिल रारा एवं मीडिया प्रभारी पुनीत जैन के अनुसार, मूलनायक भगवान को रथ पर विराजमान करने, रथ का सारथी बनने और नवीन वेदी पर विराजमान कराने का सौभाग्य ब्रह्मचारिणी सपना दीदी तथा नंदू और आयुष काला परिवार को मिला। भगवान पर छत्र चढ़ाने का सौभाग्य प्रकाश, राकेश एवं मुकेश सेठी बुराड़ा परिवार को प्राप्त हुआ। भामंडल लगाने का सौभाग्य नरेंद्र, प्रदीप एवं आनंद काला सर्राफ परिवार तथा चंवर लगाने का सौभाग्य नरेंद्र मेडिकल परिवार को मिला। वहीं सौधर्म इंद्र बनने का अवसर अजनास के दिशांक जैन परिवार को प्राप्त हुआ।
26 अक्टूबर को होगा चार दिवसीय महोत्सव का समापन
महोत्सव के सभी धार्मिक आयोजन बाल ब्रह्मचारी विनय भैया बंडा एवं बाल ब्रह्मचारी शैलू भैया के मार्गदर्शन में संपन्न हो रहे हैं। शाम को नवीन अस्थायी जिनालय में मंगल आरती, प्रवचन और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। चार दिवसीय महोत्सव का समापन 26 अक्टूबर को विशेष शांतिधारा, पूजन, विधान और मुनिश्री के मंगल प्रवचनों के साथ होगा। रात्रि में पुराने मंदिर के सामने श्री मुनिसुव्रतनाथ भगवान के इतिहास और आचार्यश्री पर आधारित फिल्म का प्रदर्शन भी प्रस्तावित है।
करीब 203 वर्षों बाद आयोजित इस धार्मिक अवसर ने खातेगांव के जैन समाज के लिए विशेष महत्व हासिल किया। श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भागीदारी कर आयोजन को यादगार बनाया।



